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आज मैं मयूर

 काले बादल छा जाते जब आसमान में,

 झुमने लागे रे मयूर घर-आँगन में |

 उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं होता...

 आज उसी ख़ुशी की जगह है मेरे मन में |

                     
 कितनी बेसबरि से था मुझे इंतजार,

 राह देखना बन गया था मेरे जीने का आधार |

 माँ ने तो याद में उनकी कितने साल बिताए -

 हर दिन हर पल उनके लौटने के सपने मुझे दिखाए !

                                     
 कहती थी माँ, एक दिन वे जरुर आएँगे,

 देखना तेरे लिए ढेर सारे खिलौने लायेंगे !

 पर खेल-खिलौनों में अब मेरी रूचि नहीं थी,

 आँखे तो उनकी एक झलक के लिए तरस गए थी !

                          
 कभी कभी पोस्टमन भैय्या आवाज लगाते -

 देख सोनू, सरहद से संदेसा आया है !!!

 ख़त में तो बड़ी प्यारी-प्यारी बाते होती थी,

 फिर भी न जाने माँ की आख़े क्यूँ ओझल होती थी?

                                       
 पर आज उन्ही आखों में है ख़ुशी की अलग चमक,

 चेहरे पर तो पहेले कभी न देखी ऐसी मुस्कान !

 मन में उठे मेरे सवाल - कही ये सपना तो नहीं?

 दिल का पूरा हो रहा था हर वो अरमान!

                                        
 मिलते ही उन्होंने मुझे गोद में जो लिया-

 वक्त मेरे लिए मानो थम सा गया...

 क्या कहू, क्या करू, कुछ भी न सूजे,

 अंग-अंग रोमांचित हो उठा !!!

                                                 
 लोग कहने लगे- "देखो देश का बहादुर जवान,

 दुश्मन को उसने उलटे पाव लौटा दिया था..."

 पर मैं तो कुछ और ही सोच रहा था -

 मेरा परिवार आज पूरा हो चूका था |

                                                 
-पवित्रा शेट्टी,(TY Comp)
Categories: Hindi
  1. Nikita Solanki
    October 11, 2010 at 2:41 pm

    Bhaari ga pavi…!!! awesm!!!

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