Home > Hindi > हिमत

हिमत

एक दिन की बात है,

भड़क उठा आम आदमी,

उठ रही थी सब तरफ से,

बस एक ही आवाज|

कब तक चलेगा ये सब,

कब तक सहेगे हम,

अब बंद करना पड़ेगा,

इन जालिमो का अत्याचार,

कर रही है हमारी

अंतरात्मा पुकार,

ख़तम करो इन सबको,

पवित्र करनी पड़ेगा इस धरती को|

कोई मदत करने वाला नहीं

आनेवाला इस बार,

एक करनी पड़ेगी हमारी तकाद,

एक जुट होकर करेगे हम सब कुछ|

अब आया है वक्त कुछ

कुछ कर देखनेका,

देखने का इन्हें

अपनी असली तकाद का नमूना|

चलो हम फिर प्रण

करते है,

और इस अधूरे कम को

अब हम पूरा करते है|

-Nikhil Gatagat

Categories: Hindi
  1. October 12, 2010 at 2:29 pm

    Really Amazing…
    Its one of the best poems I have ever read…..
    Specially I would like to give u thanks Nikhil for writing such Inspiring Poem…
    Keep it up.

  1. No trackbacks yet.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: